मुझे, पाने की जुस्तजू,
तुम्हे, खो जाऊँगा, ये डर |
ना तुमने जागना छोड़ा,
ना मुझको नींद रात भर,
कितने करीब होते हो,
जब मिलते हो जुदा होकर |
ना तुम ही जान पाए हो,
ना मिलती है मुझे खबर,
ये क्या सीने में चलता है,
ज़रा गिरकर, ज़रा उठकर |
बड़ी सीधी सी उलझन है,
जो मिलती है नहीं मिलकर |
No comments:
Post a Comment