मैं कैसे बताऊँ, के तू कौन है, तू क्या है?
खामोश सा कोई शोर है, या बातें करती ख़ामोशी |
सेहरा में खड़ी एक झरने की प्यास,
बहेती हुयी नदी है और सागर की आस |
सब कुछ चाहिए या कुछ भी नहीं,
तितली की ज़िद है, तू है फूलों का एहसास |
आधे चाँद पे लटके लम्हों को पकड़ लेती है,
और सारी रात उनसे झगड़ लेती है |
मेरे ज़हन की खिड़की के बाहर खड़ा,
शरारती आँखों से अन्दर झांकता एक बच्चा है तू |
कुछ एहसास, थोड़ी यादें, थोड़ी नाराजगी, थोड़ी ख़ुशी,
अन्दर फेंकेगा, चीजें बिखराएगा,
और यादों की पोटली हाथ में थमाए, चला जाएगा |
मैं कैसे बताऊँ, के तू कौन है, तू क्या है !
ज़रूरी हो तो रो सके,
ख़ुशी की तू ज़रुरत बन सके,
दुआ है!....
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