सो जाओ, कुछ हासिल नहीं है |
इतना सामान कब तक समेटोगे ?
जो जहाँ है, वहीँ रहने दो |
जिसके लिए जुटाया था, वो क्या करेगा अब ?
कुछ दिन हुए वो मर गया,
जिंदा रहने कि कोशिश में |
सुनते हैं किसी दफ्तर में,
एक हमशक्ल मिलता है उसका |
रात बोहोत हो चली है,
सो जाओ, कुछ हासिल नहीं है |
Amazing...
ReplyDelete